मेरे प्यारे भाइयों और उनकी हॉट बहनों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम पंकज है (उम्र २३) । इस कहानी में, आप मेरे साथ हुई एक रोमांचक घटना के बारे में पढ़ेंगे।

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माँ-पिताजी एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। तो कुछ दिनों के लिए मैं अपनी मौसी के घर पर रुक गया था। मेरी मौसी अपने पति और उनके १९ वर्षीय बेटे राजू के साथ गाँव में रहती हैं।

मेरे मौसा एक व्यापारी हैं जो कालीन बेचते हैं। वह अपने व्यवसाय में इतना व्यस्त है जिसके कारण उन्हें कभी-कभी हफ्तों तक घर से दूर रहना पड़ता है। जब मैं अपनी मौसी के घर पर रुका था, मेरे मौसा तब शहर से बाहर गए हुए थे।

मौसी के घर, मैं सुबह बाहर टहलने निकलता और दोपहर का खाना खाने के लिए घर लौटता था। मैंने राजू को भी अपने साथ घूमने बुलाया था, लेकिन उसने मना कर दिया।

मैंने सोचा कि उसे अपने दोस्तों के साथ खेलने में ज़्यादा मज़ा आता होगा, इसलिए वह मेरे साथ घूमना नहीं चाहता। मगर मैं जब भी घर लौटता, राजू घर पर ही पड़ा होता था। हरामखोर घर बैठे क्या करता था वह मुझे जानना था।

अगले दिन मैं बाहर घूमने गया ही नहीं। राजू भी घर के आसपास बेचैनी से भटक रहा था। मुझे दाल में कुछ काला लगा इलसिए मैंने एक चाल चली।

मैं घर से बाहर निकला और थोड़ी दूर चला गया। मुझे घर से बाहर जाते देख राजू दौड़ते हुए घर चला गया। मैं भी तुरंत घर चला आया और दबे पाँव घर के अंदर कदम रखा।

राजू बाथरूम की तरफ जा रहा था। मौसी बाथरूम में कपडे धो रही थी। मैंने उसका पीछा किया और बाथरूम के बाहर छुपकर खड़ा हो गया। राजू और मौसी की बाथरूम में जो बातें मैंने सुनी और जो नज़ारा देखा वह कुछ इस प्रकार की थी।

मौसी छोटे टेबल पर बैठकर कपडे धो रही थी। राजू ने पीछे से मौसी की मैक्सी उठाई और चड्डी के अंदर अपनी हथेली घुसा दी। वह मौसी की गांड की दरार को अपनी उँगलियों से सहलाने लगा।

मौसी की भूरे रंगवाली बड़ी और गोल गांड को देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था। राजू ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और अपनी माँ के कंधे पर रख दिया। मौसी राजू के लौड़े को पकड़कर हिलाने लगी।

[मौसी:] अरे मेरे राजा बेटा, रात तक सबर कर ज़रा। पंकज ने अगर देख लिया तो सारा भांडा फूट जायेगा।

[राजू:] वह बाहर घूमने चला गया तभी तो मैं तुझे टैक्स देने आया हूँ। कुत्ता बहुत देरी से निकला आज बाहर। माँ चलो वह खेल खेलते हैं।

[मौसी:] अभी नहीं बेटा, हम रात को वह खेल खेलेंगे। अभी मेरे पास बहुत काम हैं।

[राजू:] इतने दिनों से हमने वह खेल नहीं खेला और ऊपर से यह पंकज आ टपका। मुझसे अब और नहीं रहा जाता। तू ही देख मेरा लौड़ा कितना तना हुआ है।

[मौसी:] मैंने तुझे बताया था ना कि हर महीने में (चुत की तरफ इशारा करके) कुछ दिनों तक ऐसा होता है करके, तू भूल गया इतनी जल्दी? रात तक रुक जा।

[राजू:] ठीक है माँ। पर कम से कम मेरे से टैक्स तो वसूल करो।

राजू अपने लौड़े को मौसी के मुँह के पास लेकर गया। मौसी ने पहले उसके लौड़े को हिलाया और फिर उसको चूसने लगी। २-३ मिनट तक चूसकर राजू के लौड़े का पूरा माल मौसी पी गई।

[मौसी:] वाह बेटा, आज तुझसे काफी टैक्स निकला है। अभी रात को पूरा खेल खेलेंगे। अभी मुझे काम करने दे।

मैं वहाँ से निकलकर घर से बाहर भाग आया। घर से थोड़ी दूर पहुँचकर मैं एक खेत में घुसकर लेट गया। दोपहर का वक़्त होने के कारण खेत में कोई काम नहीं कर रहा था।

मैंने अपनी मौसी की गांड को याद करके मुठ मारी और थोड़ी देर बाद घर चला गया। मौसी अपने जवान बेटे के साथ खेल के नाम पर उससे चुदवाती है, यह जानकार मेरा दिल मचलने लगा था।

मैंने सोच लिया कि रात को मौसी और राजू क्या खेल खेलते है उसे देखूँगा, फिर अपनी मौसी के साथ वह खेल खेलूँगा।

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रात को खाना खाके समयानुसार मैं और राजू उसके कमरे में जाकर सो गए। सोने से पहले मौसी हम दोनों के लिए दूध का ठंडा गिलास कमरे में लेकर आई।

राजू ने जब मौसी के दाहिने हाथ वाला गिलास उठाया, तब मौसी ने उसे रोक दिया और उसे अपने बाएँ हाथ वाला गिलास पकड़ाया। मुझे तभी शक हो गया था कि हो न हो मौसी ने ज़रूर दूध में नींद की दवाई मिलाई है।

मौसी के चले जाने के बाद मैंने वह दूध का गिलास टेबल पर रख दिया। राजू मुझे पूछने लगा कि अगर मुझे दूध नहीं पीना हो तो क्या वह पी सकता है । मैं भला उस चुतिये को मना कैसे कर सकता था।

उसने मेरा वाला दूध का गिलास भी ख़तम कर दिया। हम दोनों फिर लेट कर एक दूसरे के सोने का इंतज़ार कर रहे थे। फर्क सिर्फ़ इतना था कि मुझे बिलकुल ही नींद नहीं आनेवाली थी। १५-२० मिनट बाद राजू की खर्राटों की आवाज़ आ रही थी।

मैं कमरे से बाहर आ गया और मौसी के कमरे की तरफ बढ़ा। मौसी के कमरे का दरवाजा खोलते ही मौसी मुझे देखकर चौंक उठी। मैं कमरे के अंदर घुस गया।

[मौसी:] अरे पंकज तुम! क्या तुम्हें नींद नहीं आ रही है?

[मैं:] मैंने तो दूध पीया ही नहीं, फिर मुझे नींद कैसे आएगी। मुझे तो खेलने का मन हो रहा है आपके साथ।

[मौसी:] (हैरान होकर) यह तुम क्या बोल रहे हो? मैं कुछ समझी नहीं। मुझे कोई खेल नहीं आता।

[मैं:] कैसी बात कर रही हैं आप? आपको मैंने कितनी अच्छी तरह से राजू का टैक्स वसूलते देखा है।

[मौसी:] अगर तुम किसी से नहीं कहोगे तो मैं तुम्हारा भी टैक्स वसूलने को तैयार हूँ (आँख मारते हुए) ।

मौसी की यह बात सुनकर मैंने उन्हें पकड़ा और अपनी बाहों में भर लिया। मैक्सी में उनकी बड़ी गांड और स्तन उभरकर बाहर आए थे। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और अपने हाथों से उनकी गांड को ज़ोर से मसलने लगा।

कुछ देर बाद मैंने उनकी मैक्सी उतार फेंकी। अब वह मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी। मेरा लौड़ा तनकर खड़ा हो गया। हवस के मारें मैं इतना पागल हो गया की मौसी को पकड़कर उनकी एक टांग उठाकर फैलाई और उनकी चुत चाटने लगा.

अपनी ज़ुबान को अंदर घुसाई और उनकी लाल फुद्दी को मैंने चूसना शुरू कर दिया। मौसी उत्तेजित होकर अपना निप्पल चूसने लगी। मैंने अपने हाथों से उनकी चुत्तड़ को फैलाया और फिर अपनी एक उँगली को उनकी गांड की छेड़ में घुसा दी।

थोड़ी देर के बाद हम दोनों हवस की वजह से गरम हो गए थे। मैंने मौसी को बिस्तर पर लेटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनकी चुत मारने लगा। मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारना शुरू कर दिया।

उनकी सिसकियों की आवाज़ सुनकर मैं और उत्तजित हो गया और उनके स्तनों को दबोच लिया। स्तनों को सहलाकर, दबाकर और उनके निप्पल को पकड़कर खींचते हुए मैंने मौसी की चींखे निकाली।

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२-३ मिनट तक ऐसी चुदाई करने के बाद मैंने उन्हें अपने ऊपर चढ़ा दिया। मैंने अपने लौड़े को उनकी गांड की छेड़ पर रखा और ४-५ बार धक्के मारकर लौड़े को अंदर घुसा दिया। मौसी अपनी मोटी गांड को मेरे लौड़े पर उछालने लगी।

कुछ देर और गांड चुदाई के बाद मैंने अपने लौड़े का पानी मौसी की गांड के अंदर झड़ डाली। तभी मुझे थोड़ी मस्ती करने की इच्छा हुई।

मैंने मौसी को जब अपना प्लान बताया तब वह उसे सुनकर हसने लगी। फिर मैं और मौसी राजू के कमरे में गए। मौसी को जैसा मैंने बताया था मौसी ने ठीक वैसा ही किया।

मौसी ने गहरी नींद में सोए हुए राजू के मुँह पर अपनी गांड रखी। फिर मेरे पूरे लौड़े के पानी को अपनी गांड की छेड़ से सीधा राजू के मुँह पर छिड़क दिया। अपने बेटे के मुँह पर अपनी गांड को रगडते हुए मौसी ने राजू का मुँह चमका दिया।

उस दिन के बाद मौसी ने मेरा भी टैक्स वसूलना शुरू कर दिया था.